लोक कलाकारों के बीच महापौर खुद को रोक नहीं पाईं, गाने लगीं सुग्गा, करमा के गीत

कहा-मेरे पास इतनी शक्ति नहीं, कि बाहर से आने वाले कलाकारों की फूहड़ता को रोक सकूं

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से हुआ संगीतमय आयोजन

अंबिकापुर। राजभाषा आयोग एवं संस्कृति विभाग द्वारा लोक कलाकारों के लिए सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे पास महापौर होने के नाते इतनी शक्ति नहीं है कि मैं तीज, त्यौहार, नवरात्रि, दशहरा में छत्तीसगढ़ के बाहर से आने वाले उन कलाकारों को रोक सकूं, जो यहां विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के नाम पर फूहड़ता परोसते हैं। यदि ऐसी शक्तियां होती तो मैं ऐसे आयोजकों पर कार्रवाई करती और जुर्माना लगाती। यह वक्तव्य उन्होंने फूहड़ गानों को लेकर शुरू हुई चर्चा पर अपना विचार रखते हुए कही।लोक कलाकारों के सेवा को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची महापौर मंजूषा भगत एवं छत्तीसगढ़ की संस्कृति को लेकर जो गीत, गायन हुए, उससे इतना प्रभावित हुई कि कार्यक्रम के समापन तक उपस्थित रहीं। सरगुजा जिले एवं संभाग के लोक कलाकार रंजीत सारथी, गोपाल पांडेय, आयुष नामदेव, प्रकाश रसीला, राहुल पांडेय, कविता देवांगन, फलेंद्र सिंह, बबलू सरगुजिहा, आनन्द गुप्ता ने सरगुजा की लोक संस्कृति करमा, सुग्गा एवं जीवन से जुड़ी गीत, भजन, देशभक्ति गीत सहित ऐसे गीत गाये की बिना किसी फूहड़ गाने के बावजूद लगभग 5 घण्टे तक सरस्वती महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में युवा झूमते रहे और वन्स मोर, वन्स मोर की अपील करते रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पार्षद शैलेश सिंह, डीपीओ गिरीश गुप्ता उपस्थित रहे। अन्य विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार श्याम कश्यप बैचेन, संतोष दास सरल, रविन्द्र तिवारी, कृष्णकांत पाठक ने अपने देशभक्ति पूर्ण कविताओं से सरस्वती महाविद्यालय के सभागार को तालियों के गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम में गोपाल पांडेय, रंजीत सारथी, प्रकाश रसीला के सरगुजिहा लोकगीतों ने सभागार में मौजूद लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं आयुष नामदेव के हिंदी गानों ने भी खूब शमा बांधा। कार्यक्रम का संचालन अंबिकापुर विकास समिति के संयोजक अंचल ओझा एवं आभार प्रदर्शन जन शिक्षण संस्थान के निदेशक एम. सिद्दीकी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सरस्वती महाविद्यालय के प्राचार्य महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ऋषि सिंह, वरिष्ठ प्राध्यापक धर्मेंद्र श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक सूरज कुमार, प्रवीण शर्मा, आराधना त्रिपाठी, रंजना द्विवेदी, नीलिमा जायसवाल, रितु सिंह, आयुष सिन्हा, सुरेश यादव, हीरालाल राजवाड़े, अनीशा गुप्ता, विवेक सिंह, संतलाल, पीजी कॉलेज की छात्राएं सीमा यादव, प्रियांशी राजवाड़े एवं सरस्वती महाविद्यालय की छात्र-छात्राएं तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।

सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को मौका मिले

सम्बोधन के क्रम में महापौर मंजूषा भगत ने आगे कहा न तो इस आयोजन में कोई फूहड़ गाना हुआ न ही कोई ऐसी गीत की प्रस्तुति हुई जिस पर कोई आपत्ति हो। सरगुजा की संस्कृति, लोककला, तीज, त्यौहार के प्रति गाये गए इन गीतों को लेकर आप सब में जो जोश, उत्साह दिखा और जिस तरह आप सब झूमते रहे। उन्होंने कहा मैं अपने ही सरकार से यह भी खुले मन से निवेदन करूंगी कि सरकारी कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को ही मौका मिले, फूहड़ गानों पर रोक लगे। महापौर खुद को भी नहीं रोक पाईं और जितिया, करमा, सुग्गा के गीतों को अपने भाषा में गाया और कहा कि यही हमारी संस्कृति और पहचान है। इसे प्रकट करने में घबराना नहीं है। उम्र कोई मायने नहीं रखता जब भी जिस परिस्थिति में आप हों जीवन में उमंग, उत्साह होना चाहिए। जो भी अच्छा लगे पसंद हो करिये नाचिये, गाइये, झूमिये यही जीवन का उत्साह है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत के तहत किये गए कार्यों और देश में हुए बदलाव को लेकर जानकारी साझा की।

आयोजन लोक कलाकारों के सेवा को सम्मान देने के लिए

कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर निगम के सभापति हरमिंदर सिंह टिन्नी ने कहा कि देश भर में सेवा संकल्प अभियान के जरिये कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए हम जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लंबी उम्र और उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक उनके जनहित में किए गए कार्यों को भी सबके सामने रख रहे हैं। वहीं समाज के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों को सम्मानित भी कर रहे हैं। यह आयोजन भी लोक कलाकारों के सेवा को सम्मान देने के उद्देश्य से है। निश्चित ही हम सब संगठित होकर, एकजुट होकर ही देश को समर्थ और विकसित बना सकते हैं, यही प्रधानमंत्री का हर भारतवासी से आह्वान भी है।

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