सूरजपुर को दहला देने वाले दोहरे हत्याकांड में 3 दरिंदों को फांसी, 1 को मौत तक जेल

मां से दरिंदगी, 11 साल की मासूम को चाकू से गोदने के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सूरजपुर। इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले, और शहर की रूह कंपकंपा देने वाले दोहरे हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ की मुहर लग गई। 13 अक्टूबर 2024, सूरजपुर शहर के लिए वो रात काली रात थी। कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख ड्यूटी पर थे, घर में उसकी पत्नी और 11 साल की मासूम बेटी अकेली थी। रात के अंधेरे में दरिंदे घर में घुसे। पहले महिला को दबोचा, उसके साथ दरिंदगी की। चीखती-चिल्लाती मां अपनी 11 साल की बेटी को बचाने के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन हैवानों ने मासूम को भी नहीं बख्शा। धारदार हथियार से मां-बेटी को बेरहमी से गोद डाला। इतना ही नहीं, सबूत मिटाने के लिए दोनों की लाशों को घसीटकर घर से करीब 5 किलोमीटर दूर ग्राम पीढ़ा के सुनसान इलाके में ले गए और फेंक दिया। सुबह जब इस दोहरे हत्याकांड की खबर फैली तो पूरा शहर सन्न रह गया। हर आंख नम थी, हर दिल दहला हुआ था। दो साल तक यह केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला। गुरुवार 8 अक्टूबर को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वो फैसला सुनाया, जिसका पूरे छत्तीसगढ़ को इंतजार था।

न्यायाधीश ने पढ़ा फैसला, निकले आंसू

अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने इस जघन्यतम मामले में चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया। अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू पिता अशोक साहू उम्र 25 वर्ष, चंद्रकांत उर्फ सी.के. चौधरी पिता शिवप्रसाद चौधरी 28 वर्ष और फूल सिंह उर्फ रिंकू पिता स्व. गणपत सिंह 28 वर्ष को मृत्युदंड की सजा सुनाई, यानी फांसी पर लटकाकर मौत। चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी पिता संजय विश्वकर्मा 20 वर्ष को मृत्यु पर्यन्त तक कारावास, यानी आखिरी सांस तक जेल में सड़ने की सजा दी गई है। फैसले के वक्त कोर्ट में गहमागहमी थी। पुलिस परिवार, वकील और मृतका के स्वजन मौजूद थे। जैसे ही जज ने फांसी की सजा को पढ़कर सुनाया, पीड़ित परिवार के संबंधियों की आंखों में आंसू और संतोष दोनों देखने को मिला।

फांसी सुनते ही चेहरे पर दिखा मौत का खौफ

इस मामले ने तब और सुर्खियां बटोरीं जब 28 सितंबर को दोषी करार दिए जाने के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू कोर्ट परिसर से मुस्कुराते हुए निकला और मीडिया के कैमरों में पोज दिया, उसकी वो मुस्कुराहट पूरे प्रदेश में वायरल हुई और लोगों में गुस्सा भर गया। उसके इस संवेदनहीन आचरण पर अदालत ने कड़ा ऐतराज जताया। कोर्ट ने कहा कि, ऐसे आचरण से समाज में गलत संदेश जाता है, इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। गुरुवार को जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सजा सुनाई गई तो वही कुलदीप, जो मुस्कुरा रहा था, उसके चेहरे पर मौत का खौफ था। सेंट्रल जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि जैसे ही मृत्युदंड की सजा का ऐलान हुआ, कुलदीप के चेहरे का रंग उड़ गया। जो मुस्कुरा रहा था, वही कुलदीप अब डरा-सहमा नजर आया। उसके चेहरे पर मौत का भय साफ दिख रहा था। कोर्ट के फैसले के बाद उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि वह कोई अनावश्यक कदम न उठाए। फांसी की व्यवस्था रायपुर सेंट्रल जेल में है, इसलिए कोर्ट से परमिशन लेकर शिफ्टिंग की प्रक्रिया की जाएगी।

साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा

न्यायालय ने समग्र तथ्यों, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई। कुलदीप साहू को धारा 103(1), 3(5) बीएनएस में मृत्युदंड और 25 हजार जुर्माना, धारा 70(1) में मृत्यु पर्यन्त कारावास व 20 हजार जुर्माना, धारा 331(8) में आजीवन कारावास, 20 हजार जुर्माना, धारा 238(ए) में 3 साल कठोर कारावास, 5 हजार जुर्माना, धारा 61(2) में आजीवन कारावास 20 हजार जुर्माना और छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम धारा 14 में 3 साल की सजा सुनाई। फूल सिंह और चंद्रकांत को भी इसी तरह धारा 103(1), 3(5) में फांसी, 70(1) में मृत्यु पर्यन्त कारावास सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास की सजा दी गई। आर्यन उर्फ गोल्डी को धारा 103(1), 3(5) में आजीवन कारावास 20 हजार जुर्माना, 331(8) व 49 में आजीवन कारावास, 238(ए) में 3 साल और 61(2) में आजीवन कारावास की सजा मिली।

अदालत ने तथ्यों/सबूतों के आधार पर अपराध सिद्ध माना

मामले की विवेचना उस वक्त के थाना प्रभारी निरीक्षक विमलेश दुबे ने की। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए, मोबाइल लोकेशन और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को पुख्ता तरीके से संकलित कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। प्रकरण का संचालन विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार शर्मा ने किया। अदालत ने समग्र तथ्यों और सबूतों के आधार पर अपराध सिद्ध माना। हालांकि साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपी सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को अदालत ने पूर्व में ही दोषमुक्त कर दिया था। फैसला आते ही सूरजपुर कोतवाली थाना के सामने पुलिस परिवार ने पटाखे फोड़कर अदालत के फैसले का स्वागत किया। प्रधान आरक्षक ने कहा कि उनकी पत्नी और बेटी को इंसाफ मिला है।

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