डीएमएफ के 1.32 करोड़ में गड़बड़झाला: कोर्ट ने 9 के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने दिया आदेश

जनपद सीईओ, इंजीनियर सहित अन्य की बढ़ी मुश्किलें

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला आखिरकार कोर्ट की चौखट पर आकर खुल गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंबिकापुर ने 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये के घोटाले में 9 अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर जांच करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। यह आदेश समाजसेवी अभय नारायण पांडेय संजय पार्क अंबिकापुर की ओर से अधिवक्ता शत्रुधन सिंह द्वारा धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत पेश किए गए परिवाद पर दिया गया है। परिवादी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि डीएमएफ मद की करोड़ों की राशि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़प लिया गया है।

तीन प्रोजेक्ट, जिसे बनाया जेब भरने का जरिया

मामला ग्राम पंचायत केशवपुर के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय के नाम पर निकाले गए तीन कार्यों का है। पहला-गार्डन सौंदर्यीकरण एवं शीशी रोड निर्माण 33.24 लाख रुपये, दूसरा-प्रथम तल पर प्रयोगशाला, पुस्तकालय का नवीनीकरण व अहाता निर्माण 49.57 लाख रुपये, तीसरा-भू-तल पर प्राचार्य कक्ष, ऑफिस नवीनीकरण एवं पार्किंग शेड 49.52 लाख रुपये, कुल स्वीकृति 1,32,33,000 रुपये थी।कोर्ट के आदेश में उल्लेख है कि प्रशासनिक स्वीकृति आदेश क्रमांक 230170644981, 2301760661 और 230172560736 दिनांक 31.03.2023 को 21 कड़ी शर्तों के साथ जारी की गई थी, लेकिन आरोपियों ने सभी शर्तों को ताक पर रख दिया। जैम पोर्टल, निविदा, कोटेशन, तकनीकी स्वीकृति, इस्टीमेट जैसे किसी भी अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।परिवाद के अनुसार 01.08.2023 को मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर अंबिकापुर को 48,36,544 रुपये का भुगतान आरटीजीएस से कर दिया गया, जबकि कार्य स्थल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा यह सामने आया कि अनावेदक क्रमांक 8 मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स का कोई बिल-वाउचर नहीं मिला और जांच में उसका मोबाइल नंबर 9301006090 अनावेदक क्रमांक 7 सुयस अग्रवाल का निकला। यानी एक ही व्यक्ति दो फर्मों के नाम पर खेल कर रहा था।

सरपंच-सचिव ने खोला राज

परिवादी ने जब पंचायत से जानकारी मांगी तो तत्कालीन सरपंच इस्तान सिंह और सचिव राम प्रकाश यादव ने बताया कि उन्हें जनपद पंचायत अंबिकापुर बुलाया गया, उनके खाते में राशि डाली गई और उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर ने चेक से भुगतान करने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि हम अधिकारी का आदेश मानने को मजबूर थे।इस घोटाले की शिकायत जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव से की गई थी। इस पर कलेक्टर सरगुजा ने आदेश दिनांक 29.08.2024 से चार सदस्यीय जांच टीम बनाई। जांच रिपोर्ट में भी वित्तीय अनियमितता उजागर हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया धारा 34, 120बी, 201, 409, 420, 467, 468, 471 भादवि के तहत अपराध प्रमाणित मानते हुए संबंधित थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

इन 9 के विरूद्ध दर्ज होगी एफआईआर

सुरेश्वर नाथ तिवारी तत्कालीन सीईओ जनपद पंचायत अंबिकापुर, विवेक प्रताप सिंह राठौर उप अभियंता, उपेन्द्र सिंह सेंगर प्रभारी एसडीओ व वर्तमान उप अभियंता, शैलेन्द्र मिश्र सहायक ग्रेड-02 लिपिक, राम प्रकाश यादव तत्कालीन सचिव केशवपुर, इस्तान सिंह – तत्कालीन सरपंच केशवपुर, सुयस अग्रवाल – व्यवसायी रायपुर, अरविंद कुमार अग्रवाल मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन, मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर अंबिकापुर। कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद जिले के अफसरों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

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