स्वास्थ्य विभाग ने महावीर अस्पताल का लाइसेंस किया सस्पेंड, आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

क्यूआर कोड स्कैन करने से खुली पोल, स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस किया सस्पेंड, आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

झारखंड के डॉक्टर की डिग्री में कूटरचना, महावीर अस्पताल में 2 साल से बिहार का युवक डाक्टर बनकर कर रहा था नौकरी

अंबिकापुर। अंबिकापुर के निजी अस्पतालों में किस तरह मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है, इसका बड़ा उदाहरण सामने आया है। शहर के सबसे व्यस्त इलाके गांधीनगर के सुभाषनगर स्थित प्रतिष्ठित महावीर अस्पताल में पिछले 2 साल से एक फर्जी डॉक्टर आइसीयू में मरीजों का इलाज कर रहा था। उसके पास डॉक्टर की कोई डिग्री नहीं थी, वह दूसरे व्यक्ति की डिग्री में छेड़छाड़ करके नौकरी कर रहा था।

बिहार का रहने वाला था आरोपित

आरोपी का नाम नुरेन आलम 30 साल है। वह मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया थाना क्षेत्र के गांव फततौला का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले वह अंबिकापुर आया और साईं मंदिर के सामने स्थित महावीर अस्पताल में फिजियोथेरेपी सहायक के तौर पर काम पर लगा। धीरे-धीरे उसने खुद को डॉक्टर के रूप में पेश करना शुरू कर दिया और अस्पताल प्रबंधन ने उसे आईसीयू जैसी गंभीर जगह पर तैनात कर दिया, जहां गंभीर मरीज भर्ती होते हैं।

सीएमएचओ की टीम ने मारा छापा

16 अक्टूबर 2026 को जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को निजी अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों के काम करने की शिकायत मिली थी। इस पर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी की टीम ने महावीर अस्पताल में औचक निरीक्षण किया। टीम ने वहां मौजूद सभी डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ से उनकी शैक्षणिक योग्यता, डिग्री और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र मांगे। जब नुरेन आलम की बारी आई तो उसने एक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिखाया। अधिकारियों को दस्तावेज पर शक हुआ तो उन्होंने उसके ऊपर लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन किया। स्कैन करते ही पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। क्यूआर कोड स्कैन करने पर जो जानकारी आई, वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर थी।

झारखंड के अभिज्ञान की डिग्री का किया इस्तेमाल

जांच में पता चला कि नुरेन आलम जिस सर्टिफिकेट को अपना बता रहा था, वह असल में झारखंड निवासी अभिज्ञान कुमार नाम के व्यक्ति का था। आरोपी ने बड़ी चालाकी से उस प्रमाण पत्र में फोटो बदलकर और कूटरचना कर अपना नाम जोड़ दिया था और उसी के आधार पर अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी पा ली थी।

अस्पताल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। बिना योग्यता जांचे फर्जी व्यक्ति को डॉक्टर के पद पर रखने के आरोप में महावीर अस्पताल का लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

एफआईआर के बाद से फरार आरोपित

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की शिकायत पर गांधीनगर थाने में नुरेन आलम के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी दस्तावेज बनाकर इस्तेमाल करने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। केस दर्ज होते ही आरोपी अस्पताल और शहर से फरार हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अंबिकापुर कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया। 3 नवंबर 2026 को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर की कोर्ट में सुनवाई हुई। शासन की ओर से लोक अभियोजक प्रकाश मणि त्रिपाठी ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा और कहा कि आरोपी ने लोगों की जान से खिलवाड़ किया है, यह गंभीर अपराध है और इसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अब पुलिस उसकी तलाश में बिहार तक दबिश दे रही है।

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