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पेंशन बंद होने से सेवानिवृत्त बुजुर्ग प्राध्यापक संकट में

अनुदानित कॉलेजों में दिए थे सेवा, राज्यपाल और पीएम को भेजी व्यथा

अंबिकापुर। जीवन के 30-40 साल छात्रों का भविष्य संवारने में लगाने वाले अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापक और कर्मचारी अब पेंशन के लिए धरने पर बैठने को मजबूर हैं। बुधवार को होली क्रॉस कॉलेज परिसर में पेंशनभोगियों ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन कर कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा।छत्तीसगढ़ अनुदान प्राप्त शिक्षक संघ के अनुसार प्रदेश भर में 400 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापक-कर्मचारी प्रभावित हैं। जुलाई और अगस्त की पेंशन नहीं मिलने से बुजुर्गों के सामने दवा, इलाज और रोजमर्रा के खर्च का संकट खड़ा हो गया है। संघ का आरोप है कि राज्य सरकार के 1 सितंबर 2026 के आदेश के बाद सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन रोक दी गई, वहीं 11 सितंबर के आदेश से कार्यरत प्राध्यापकों की पेंशन-ग्रेच्युटी की पात्रता ही समाप्त कर दी गई।आंदोलनकारियों ने बताया कि अनुदानित महाविद्यालयों में पिछले 37 वर्षों से पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ मिल रहा था। 2010 में भी सरकार ने भुगतान का आदेश जारी किया था। 80 से अधिक प्राध्यापकों ने वेतनमान के अनुरूप पेंशन के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, राहत मिलने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर 50 से अधिक प्राध्यापकों ने अवमानना याचिका दायर की है। पेंशन भोगियों ने आदेश वापस लेने, पेंशन तत्काल बहाल करने और जुलाई-अगस्त की बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की है। धरने में डॉ. कल्पना गुहा, सविता राय, डॉ. उषा शुक्ला, डॉ. तृप्ति पांडे, डॉ. ममता अवस्थी, ममता लकड़ा, शहजादी, मरियम लियोनी खेस, विजय लकड़ा सहित कई पेंशनभोगी शामिल रहे।

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