संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में बिना टेंडर के ऑडिटोरियम में लाखों का काम

फर्म ने तीन दिन में जवाब नहीं देने पर हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा एक बार फिर टेंडर को लेकर विवादों में घिर गया है। यहां टेंडर निरस्त करने का हवाला देकर बिना टेंडर के ही ऑडिटोरियम में लाखों रुपये का काम करा दिया गया। इसे लेकर पारिजात एजेंसी ने कुलसचिव को लिखित आवेदन देकर तीन दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, अन्यथा न्यायालय जाने की चेतावनी दी है। मामला टेंडर दिनांक 24.04.2026 से जुड़ा है। बड़ी बात यह है कि टेंडर निरस्त होने की जानकारी कुलसचित तक को नहीं है, जो इसके अध्यक्ष हैं। जानकारी के मुताबिक, फर्म ने सूचना के अधिकार के तहत इस टेंडर से संबंधित नस्ती, नोटशीट, पत्राचार, अनुमोदन, निविदा कार्रवाई और कार्यादेश की जानकारी मांगी थी। जवाब में संपदा अधिकारी ने अधूरी जानकारी देते हुए कहा कि उक्त टेंडर निरस्त कर दिया गया है। इसी जवाब ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवेदक फर्म का कहना है कि यदि टेंडर सीरियल नंबर 10 निरस्त कर दिया गया था। सवाल यह भी उठ रहा है कि, ऑडिटोरियम भवन में मेटल रफिंग शीट्स लगाने का कार्य बिना टेंडर के क्यों कराया गया? फर्म ने कुलसचिव से पूछा है कि टेंडर किस अधिकारी के निर्देश पर और किस दिनांक को निरस्त किया गया? यदि टेंडर निरस्त था तो बिना टेंडर के कार्य किस आदेश से, किस मद से और किस फर्म से पूरा कर दिया गया? कार्यादेश किसने दिया, भुगतान किस मद से हुआ? ऐसे में संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय की मनमाना कार्यप्रणाली एक बार फिर सामने आई है। इसमें सीधे तौर पर भ्रष्टाचार परिलक्षित होने पर फर्म संचालक ने 3 दिन के भीतर न्यायालय जाने की चेतावनी दी है।

इस पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि विश्वविद्यालय के दर्रीपारा और ग्राम भकुरा स्थित परिसर में अलग-अलग काम के लिए 10 टेंडर निकाले गए थे। इसके लिए बकायदा छत्तीसगढ़ शासन के संवाद से नियमानुसार विज्ञापन राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अखबारों में प्रकाशित हुआ था। काम होने के बाद टेंडर के निरस्त होने की जानकारी मुझे आज ही मिली है, जिसे 27 अगस्त को निरस्त किया गया है।

Share with