साल्ही मोड़ पर अस्पताल निर्माण के लिए 10 एकड़ जमीन का सीमांकन ग्रामीणों ने उठाया महुआ पेड़ों और मुआवजे का मुद्दा

उदयपुर। पीईकेबी कोयला परियोजना प्रभावित उदयपुर क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रस्तावित अस्पताल निर्माण की दिशा में ग्राम पंचायत साल्ही के साल्ही मोड़ से 200 मीटर आगे करीब 10 एकड़ जमीन का अस्पताल के लिए सीमांकन किया गया है। मंगलवार को सुबह 11.30 बजे शुरू हुई सीमांकन प्रक्रिया में एसडीएम रामराज सिंह, तहसीलदार तारा सिदार, आरआई, पटवारी और राजस्व विभाग की टीम के साथ एसडीओपी राकेश बघेल, थाना प्रभारी शिशिरकांत सिंह और पुलिस स्टाफ मौजूद रहे। वहीं सरपंच प्रतिनिधि विजय सिंह, पूर्व सरपंच विजय कोर्राम, ठाकुर राम देव सिंह करियाम, भगवती सिंह, आनंद खुसरो सहित 30-40 ग्रामीण और कंपनी प्रबंधन के अधिकारी भी उपस्थित रहे।महुआ के पेड़ों और कब्जे का मुद्दासीमांकन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित जमीन शासकीय गौचर भूमि है, जिस पर आनंद खुसरो, भगवती सिंह, बुधराम, अलकराम, बलराम सिंह, ठाकुर राम सहित कई ग्रामीण लंबे समय से खेती कर रहे हैं। जमीन पर 50-60 महुआ के पेड़ सहित अन्य पेड़ हैं, जिनसे उनकी आजीविका जुड़ी है। पेड़ों को हटाने की आशंका पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई।

15 दिन में दोबारा सर्वे के निर्देश

ग्रामीणों की आपत्ति सुनने के बाद एसडीएम रामराज सिंह ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन का फिर से सर्वे करें। प्रत्येक ग्रामीण के कब्जे वाली भूमि, महुआ और अन्य पेड़ों की संख्या का अलग-अलग विवरण तैयार करके 15 दिनों के भीतर तहसील कार्यालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके बाद नियमानुसार मुआवजे पर विचार किया जाएगा। पूर्व सरपंच विजय कोर्राम और सरपंच प्रतिनिधि ने कहा कि जब तक जमीन, कब्जे और मुआवजे का मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, तब तक निर्माण शुरू न किया जाए।

वर्षों से इंतजार कर रहे ग्रामीण

बता दें कि परसा ईस्ट एवं केता बासेन द्वारा कोयला परियोजना का संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के लिए किया जा रहा है, जिसमें अडानी समूह की कंपनी की भूमिका है। 2023 में ग्रामीणों ने साल्ही मोड़ पर अस्पताल की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि, अस्पताल में आपातकालीन उपचार, विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रसूति एवं शिशु चिकित्सा, जांच सुविधाएं और ऑपरेशन थिएटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इन सबके बीच अब सबकी नजर 15 दिन में होने वाले दोबारा सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी है।

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