अंबिकापुर से नई ट्रेन की मांग पर ब्रेक, रेलवे ने कहा-स्टेशन में जगह नहीं

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर से नई इंटरसिटी ट्रेन चलाने और शहडोल आने वाली ट्रेन को अंबिकापुर तक बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग पर रेलवे डिवीजन ने परिचालनिक बाध्यता और लाइन की अनुपलब्धता को आड़े लेते हुए फिलहाल नई ट्रेन शुरू करने में असमर्थता जताई है, जबकि स्टेशन के विकास कार्यों को हरी झंडी दे दी है। रेलवे डिवीजन बिलासपुर और पीसीसीएम कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार नई इंटरसिटी ट्रेन चलाने संबंधी नीतिगत निर्णय रेलवे बोर्ड के क्षेत्राधिकार में आता है। डिवीजन ने अपने जवाब में कहा है कि वर्तमान में अंबिकापुर रेलवे स्टेशन की स्टेबलिंग क्षमता पूरी तरह से भरी हुई है।

रेलवे के अनुसार, वर्तमान में अंबिकापुर स्टेशन में रात के समय तीन महत्वपूर्ण ट्रेनों के रैक पहले से ही खड़े रहते हैं। इनमें गाड़ी संख्या 11265-66 जबलपुर-अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस, 22408 हजरत निजामुद्दीन-अंबिकापुर एक्सप्रेस और 18755 शहडोल-अंबिकापुर ट्रेन शामिल हैं। ये तीनों रैक रात भर अंबिकापुर में ही स्टेबल रहते हैं और सुबह अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होते हैं। रेलवे का तर्क है कि, यदि अंबिकापुर से सुबह के समय बिलासपुर या शहडोल के लिए कोई नई इंटरसिटी ट्रेन शुरू की जाती है तो उसके रैक को भी रात में अंबिकापुर में ही रखना होगा, जिसके लिए स्टेशन में अतिरिक्त स्टेबलिंग लाइन उपलब्ध नहीं है। यही सबसे बड़ी परिचालनिक बाध्यता है जिसके कारण नई ट्रेन का परिचालन संभव नहीं हो पा रहा है।

शहडोल वाली ट्रेन का विस्तार भी संभव नहीं

दूसरी मांग शहडोल से चलने वाली ट्रेन को अंबिकापुर तक विस्तार देने की थी। इस पर रेलवे ने स्पष्ट किया है कि संबंधित ट्रेन सेंट्रल रेलवे जोन की गाड़ी है। इस ट्रेन का शहडोल आगमन रात 10 बजे होता है और सुबह 5 बजे वह शहडोल से वापस अपने गंतव्य के लिए रवाना हो जाती है। इस प्रकार शहडोल में उसका ठहराव केवल 7 घंटे का है। इतने कम लाई-ओवर समय में ट्रेन को अंबिकापुर तक लाना, वहां से वापस शहडोल ले जाना परिचालनिक रूप से संभव नहीं है। 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के लिए कम से कम 10 से 12 घंटे का लाई-ओवर चाहिए। साथ ही अंबिकापुर स्टेशन में लाइन अनुपलब्धता की समस्या भी इस विस्तार में बाधा बन रही है।

इसलिए जरूरी है नई ट्रेन

अंबिकापुर से नई ट्रेन की मांग कोई नई नहीं है। सरगुजा संभाग के लोग, व्यापारी, छात्र और नौकरीपेशा लोग लंबे समय से अंबिकापुर से बिलासपुर, रायपुर और शहडोल के लिए सुबह के समय एक इंटरसिटी ट्रेन की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में अंबिकापुर से बिलासपुर के लिए सीधी ट्रेनें शाम या रात में हैं, सुबह के समय कोई विकल्प नहीं है। जबलपुर-अंबिकापुर ट्रेन के अलावा दिन में सफर करने वालों को काफी परेशानी होती है। जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।

स्टेशन के विकास को मिली मंजूरी

हालांकि यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। रेलवे ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्टेशन पर कोच डिस्प्ले बोर्ड की स्थापना, नया पैदल ऊपरी पुल, लिफ्ट की सुविधा और समग्र स्टेशन उन्नयन के कार्य कराए जाएंगे। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अंबिकापुर स्टेशन का चयन पहले ही हो चुका है। इन सुविधाओं के पूरा होने से दिव्यांग, बुजुर्ग और सामान्य यात्रियों को प्लेटफार्म बदलने और कोच की सही जानकारी प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

फाइनल लोकेशन सर्वे स्वीकृत, निविदा आमंत्रित

अंबिकापुर-सूरजपुर रोड तक लगभग 37 किलोमीटर रेल लाइन के शीघ्र दोहरीकरण की मांग पर रेलवे ने बताया है कि, वर्तमान में सूरजपुर से बैकुण्ठपुर 40 किलोमीटर तक दोहरीकरण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। बौरीडांड से बैकुण्ठपुर सेक्शन के कार्य के लिए निविदा फाइनल कर दी गई है। सूरजपुर से अंबिकापुर 37 किलोमीटर के इस बहुप्रतीक्षित दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत हो गया है, जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। इस लाइन के डबल होने से सरगुजा संभाग में रेल यातायात सुगम होगा और ट्रेनों की लेट-लतीफी की समस्या खत्म होने की उम्मीद है।

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