रायपुर। झीरम घाटी नरसंहार में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले को अजूबा बताते हुए कहा कि इसमें गरीब और ग्रामीण आदिवासियों के साथ अन्याय हुआ है। रावटे ने कहा कि 13 साल बाद आए फैसले में भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। उनके अनुसार गोली चलाने और चलवाने वालों की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं हुई, उनके नाम तक जांच में ठीक से नहीं आए। जबकि जिन ग्रामीणों ने डर से पानी पिलाया, खाना खिलाया या रास्ता बताया, उन्हें ही सजा मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली चलाने और चलवाने वाले आज सरकार के गलियारों और विधानसभा में घूम रहे हैं। गांव का गरीब व्यक्ति बंदूक के डर से मजबूर होता है, उसकी परिस्थिति को अलग नजरिए से देखना चाहिए था।
रावटे ने छत्तीसगढ़ की जेलों में नक्सल सहयोग के आरोप में बंद सैकड़ों आदिवासियों का मुद्दा उठाते हुए उनकी रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा बनाई गई समीक्षा कमेटी में सर्व आदिवासी समाज को शामिल नहीं किया गया और उसकी रिपोर्ट का भी पता नहीं है। सरेंडर करने वाले पूर्व नक्सलियों के स्वागत पर भी उन्होंने सवाल उठाया। रावटे ने कहा कि जांच को सही दिशा में नहीं ले जाया गया और यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो इस मामले को फिर से खोला जाएगा।

