अस्पताल में लटका मिला ताला, प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला ने गेट के बाहर दिया बच्चे को जन्म

उपचार के आभाव में नवजात की मौत, मामले में सीएचएमओ ने दो कर्मचारियो को किया निलंबित

सूरजपुर। सारकारी अस्पतालों में मरीजो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच जिले के रामानुजनगर विकासखंड से सामने आई एक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेशपुर में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को समय पर उपचार नहीं मिलने और अस्पताल के गेट के सामने प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के लापरवाही पर दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।स्वास्थ्य विभाग से जारी आदेश के अनुसार, कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों में ग्रामीण चिकित्सा सहायक,लराजेश पटेल तथा एएनएमप्रमीला गिरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेशपुर शामिल हैं। गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह द्वारा जारी आदेश में मामले में लापरवाही और जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। बताया गया है कि14 अक्टूबर की रात जिले के पवनपुर तलवापारा निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेशपुर लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ताला लगा हुआ था और डॉक्टर एवं नर्स उपस्थित नहीं थे। रात के समय परिजन मदद के लिए आवाज लगाते रहे, लेकिन उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका। अस्पताल के गेट के सामने ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार, जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर में भर्ती कराया।

नवजात की मौत के बाद भड़का आक्रोश

घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेशपुर के गेट पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।मामले की गंभीरता को देखते हुए रामानुजनगर एसडीएम और थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंचे थे। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में सुधार करने और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और रात के समय आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव जैसी आपात स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र में ताला लगा होने और समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।फिलहाल, मामले में दो कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।फ़ोटो-

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