इंस्टाग्राम में सीमेंट का प्रचार देखना महंगा पड़ा, ईंट के कारोबारी से 4.13 लाख की ठगी

अंबिकापुर। सोशल मीडिया पर प्रचार देखकर सामान मंगाना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका ताजा उदाहरण अंबिकापुर में सामने आया है। यहां एक ईंट कारोबारी को नामी कंपनी का सीमेंट भेजने के नाम पर 4 लाख 13 हजार रुपये की बड़ी चपत लगा दी गई। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित सिटी कोतवाली पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात शातिरों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, रिंग रोड प्रतापपुर नाका निवासी सुभय पाण्डेय पिता उमेश्वर नाथ पाण्डेय का सूरजपुर जिले के प्रतापपुर में फ्लाई ऐश ईंट का कारोबार है। इसके लिए उन्हें सीमेंट की भी जरूरत पड़ती है। बीते 2 अक्टूबर को वे अपने मोबाइल पर इंस्टाग्राम चला रहे थे, तभी उनकी नजर अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के एक आकर्षक विज्ञापन पर पड़ी। उन्होंने लिंक पर क्लिक करके अपना नंबर छोड़ दिया। बस यहीं से ठगी का जाल बुनना शुरू हो गया। कुछ ही देर में उनके मोबाइल पर एक अननोन नंबर से कॉल आया। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से एक व्यक्ति ने बड़े ही प्रोफेशनल अंदाज में अपना नाम कल्पेश सिन्हा और पदनाम कंपनी का सेल्स मैनेजर बताया। उसने कंपनी के रेट, डिस्काउंट और सप्लाई चेन की ऐसी जानकारी दी कि सुभय को जरा भी शक नहीं हुआ। विश्वास जीतने के बाद शातिर ने दूसरा दांव खेला। उन्होंने ई-मेल पर कंपनी के लेटर हेड पर मेल भेजा और उनकी फर्म मां श्यामा ट्रेडर्स, प्रोपराइटर श्रीमती श्यामा पाण्डेय के सभी दस्तावेज मांगे।

वेंडर कोड जनरेट करके भेजा कथित कंपनी का खाता नंबर

कुछ घंटों बाद ही पीड़ित के मेल पर एक वेंडर कोड जनरेट करके भेज दिया गया। साथ ही कंपनी का बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड भेजकर कहा गया कि यह अल्ट्राटेक का अधिकृत खाता है और एडवांस पेमेंट करने पर माल डिस्पैच हो जाएगा। खाता अंधेरी ईस्ट, मुंबई में संजीव कुमार के नाम पर था। बिना किसी संदेह के सुभय पाण्डेय ने 7 अक्टूबर को 1400 बैग सीमेंट के लिए प्रति बैग 295 रुपये के हिसाब से कुल 4 लाख 13 हजार रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। पैसा भेजने के बाद वे सीमेंट के आने का इंतजार करने लगे, लेकिन दिन बीतते गए सीमेंट की एक बोरी भी नहीं पहुंची। जब उन्होंने कथित सेल्स मैनेजर कल्पेश सिन्हा को फोन लगाया तो कोई जवाब नहीं मिला। ई-मेल का भी कोई जवाब नहीं आया। तब जाकर उन्हें समझ आया कि वे ठगों के जाल में फंस चुके हैं। उन्होंने पूरे दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल के साथ सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर मुम्बई वाले खाते और ई-मेल आईडी के आधार पर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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