बस का ब्रेक डाउन हुआ, भूखे-प्यासे खिलाड़ी देर रात तक भटकते रहे

विधायक तक पहुंची खबर तो जिम्मेदारों की नींद टूटी, जिला स्तरीय ओलंपिक में आए थे खिलाड़ी बच्चे

अंबिकापुर। शहर के गांधी स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय ओलंपिक में शामिल होने सरगुजा जिले के सीतापुर से आए स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरूवार को बच्चों को शाम 4 बजे खाना खाने के लिए दिया गया, इसके बाद ये घर जाने के लिए बस का इंतजार करते रह गए। देर रात तक ठंड में भूखे-प्यासे बच्चे स्टेडियम गेट पर भटक रहे थे। इनके साथ पीटीआई थे, लेकिन वे भी बस के नहीं पहुंचने से परेशान थे। मामला सीतापुर विधायक तक बच्चों के माध्यम से पहुंचा तो मौके पर पहुंची महिला अधिकारी ने इन्हें डिनर कराने के बाद रवाना करने की बात कही। साथ ही ऐसी परिस्थिति क्यों बनी, इसकी जांच कराने की बात भी कही है।

सीतापुर से खो-खो खेलने आए रोहन एक्का ने बताया कि वह 5 नवंबर को अंबिकापुर आया था। रहने के लिए कमरा दिया गया था, लेकिन 6 नवंबर को खेल समाप्ति के बाद उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं है। इसी तरह केसला से आए मुकेश कुमार ने कहा कि शाम 4 बजे खाना खाने के बाद से वे बस का इंतजार कर रहे हैं। रहने के लिए जगह भी नहीं दी गई है, ताकि वे ठंड में सुरक्षित रह सकें। बच्चों ने वीडियो कॉल करके विधायक रामकुमार टोप्पो के संज्ञान में मामला लाया और देर रात तक भटकते बच्चों की स्थिति से वाकिफ कराया। इसके बाद आननफानन में मौके पर पहुंचे अधिकारी ने माना कि बस का ब्रेकडाउन होने की वजह से बच्चे फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही सूचना मिली, हम मौके पर आए हैं। बच्चों को पहले डिनर कराया जाएगा, फिर घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

इस दौरान कुछ समाजसेवी भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्चों से पूछताछ की तो इनके सामने भी बच्चों ने अपना दुखड़ा सुनाया। बच्चे लगातार कह रहे थे कि अब उन्हें खाना नहीं चाहिए, बस किसी तरह घर तक पहुंचवा दिया जाए। जिला स्तरीय आयोजन में नाबालिग बच्चों की सुरक्षा, भोजन और वापसी की जिम्मेदारी प्रशासन की थी, लेकिन शाम होते ही उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। रात 11 बजे तक बच्चे बैग टांगे स्टेडियम के बाहर खड़े रहे। इस घटना ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेलने आए बच्चों के साथ इस तरह की उपेक्षा से अभिभावकों में भी आक्रोश है। अब देखना यह है कि वृहद आयोजन के बीच बच्चों को भूखे-प्यासे छोड़ देने के मामले में प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

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