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छात्रावासों की बदहाली और प्रभारी व्यवस्था पर फूटा आदिवासी समाज का गुस्सा 15 दिन का अल्टीमेटम

राजेंद्र ठाकुर (राजू) ब्यूरो कार्यालय बलरामपुर

बलरामपुर जिले में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त पद पर समीक्षा जायसवाल को प्रभारी के रूप में पदस्थ रखे जाने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के नाम ज्ञापन सौपकर उन्होंने प्रभारी पदस्थापना समाप्त कर पद पर नियमित एवं योग्य अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग की है।ज्ञापन में कहा कि बलरामपुर जिला आदिवासी बाहुल्य होने के साथ संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल है। ऐसे जिले में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त का पद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला है। इसके बावजूद लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के तहत पद का संचालन किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज में नाराजगी है।
बसंत कुजूर ने छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के 24 जुलाई 2010 के परिपत्र का हवाला देते हुए कहा है कि प्रभारी व्यवस्था को लेकर निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रभारी पदस्थापना की अवधि और उसकी वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 46 और 335 का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा के लिए विभाग में अनुभवी और योग्य अधिकारी की पदस्थापना जरूरी है।

आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल

समाज ने छात्रावासों में बच्चों को बिना अनुमति बाहर ले जाने छात्रवृत्ति भोजन व्यवस्था बच्चों के साथ मारपीट तथा जर्जर भवनों से संबंधित शिकायतों का उल्लेख करते हुए विभागीय निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि समीक्षा जायसवाल को प्रभारी सहायक आयुक्त के प्रभार से मुक्त कर नियमित सहायक आयुक्त अथवा वरिष्ठ एवं योग्य अधिकारी की पदस्थापना की जाए। साथ ही प्रभारी व्यवस्था की अवधि और संबंधित आदेश की वैधता की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

15 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं जायगे कोर्ट

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के श्री अध्यक्ष के कहा कि जिला बलरामपुर द्वारा माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका दायर करने के साथ अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत प्रस्तुत की जाएगी कलेक्टर बलरामपुर मुख्यमंत्री कार्यालय और आदिम जाति कल्याण मंत्री को भी भेजी गई है।

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