कुलपति-कुलसचिव में ठनी, विवादित को संपदा का प्रभार देने का आरोप

कुलसचिव ने कहा-मेरी मौजूदगी में सहायक कुलसचिव से आदेश निकलवाया, उनकी नियुक्ति पर उठा रहे उंगली

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है। कुलसचिव ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यालय में रहते हुए ही 5 अक्टूबर को सहायक कुलसचिव से नियम विरुद्ध आदेश निकलवा दिया गया।कुलसचिव ने कहा, उनके विरूद्ध स्तरहीन बयान दिए जा रहे हैं, मुझे दुख है कि मैं ऐसे नेतृत्व के साथ कार्य कर रहा हूं। सीधे तौर पर प्रेशराइज करके काम कराया जा रहा है। अभी-अभी तुरंत में एक आदेश इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने बताया कि वह 5 अक्टूबर को वे खुद कार्यालय में उपस्थित हैं, लेकिन इसी दिनांक का एक आदेश सहायक कुलसचिव के हस्ताक्षर से निकाल दिया गया कि किसको कहां प्रभार देना है। इस आदेश में चुन्नीलाल टंडन नाम के कर्मचारी को फिर से संपदा का प्रभार दिया गया है। कुलसचिव ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, टंडन को विवाद के कारण ही संपदा से हटाया गया था, फिर उन्हें वहीं बैठा दिया गया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में इन्होंने विवाद पैदा किया, बस्तर विश्वविद्यालय में रहे वहां विवाद पैदा हुआ, वहां से सस्पेंड हुए हैं। ऐसे व्यक्ति को फिर से कुलपति के द्वारा उपकृत क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है। मैं ये सब नहीं होने देता इसलिए नजरअंदाज कर दिया गया। कुलसचिव ने खुलासा किया कि सहायक कुलसचिव ने सुबह आकर खुद उनसे कहा कि ‘सर मुझे बहुत प्रेशराइज किया जा रहा है।Ó इस पर उन्होंने दो टूक कहा कि, ‘मैं नियम का पालन करूंगा क्योंकि मैं कुलपति से नहीं शासन से पेमेंट पाता हूं, इसलिए शासन के प्रति उत्तरदायी हूं।Ó उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में पहले भी कुलपति और कुलसचिव के बीच विवाद होते रहे हैं, लेकिन वो इसे विवाद नहीं मानते, उनकी नियुक्ति नियमों का पालन कराने के लिए शासन के नियमों के अनुरूप और मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद हुई है, इस पर सवाल उठाने का काम किया जा रहा है। पिछले 2-3 महीनों से उन पर कई फाइलों को नियम विरुद्ध तरीके से क्लीयर करने का दबाव बनाया जा रहा है।

बिना विज्ञापन संविदा नियुक्ति और बिना टेंडर खरीदी भुगतान का दबावसंत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कुलपति पर नियम विरुद्ध काम कराने के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दबाव बनाने का आरोप लगाया है। कुलसचिव के अनुसार कुलपति बिना कोई विज्ञापन निकाले सीधे संविदा नियुक्ति कर रहे हैं, जबकि नियम के अनुसार संविदा नियुक्ति के लिए भी विज्ञापन निकालना अनिवार्य है। खरीदी की एक तय प्रक्रिया है। पहले डिमांड स्टोर से आती है, फिर फाइनेंस देखता है, उसके बाद कुलपति की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलती है, फिर जेम पोर्टल पर टेंडर होता है, परचेस कमेटी बैठती है और तब जाकर कार्यादेश जारी होता है। इधर कुलपति ने बिना किसी प्रक्रिया के सामग्री खरीद कर भुगतान का निर्देश दे रहे हैं। शासकीय राशि का ऐसे भुगतान नहीं किया जा सकता। फाइनेंस ऑफिसर ने भी इस पर आपत्ति जताई है। कुलसचिव ने एक दस्तावेज दिखाते हुए कहा ‘अगर मैं ये सब कर दूं तो मैं ठीक हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता। जरूरी सामानों की खरीदी होनी चाहिए लेकिन प्रक्रिया से खरीदना चाहिए। विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रहे इन आरोप-प्रत्यारोप से उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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