80 साल बाद भी सर्वे में उलझी सरगुजा की रेल

16 साल वाली डोंगरगढ़-कटघोरा लाइन को मिली कैबिनेट में मंजूरी, मुख्यमंत्री के साथ बैठे थे सरगुजा संभाग के 4 मंत्री

अंबिकापुर। केंद्र की कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ की डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से प्रदेश को बड़ी सौगात मिली है, लेकिन इस मंजूरी ने सरगुजा के लिए एक तीखा सवाल भी खड़ा कर दिया है। जिस कैबिनेट में यह मंजूरी मिली, उसमें मुख्यमंत्री के साथ सरगुजा संभाग से आने वाले चार कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे। फिर भी सरगुजा की 80 साल पुरानी रेल मांग आज तक सर्वे की फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई।

सवाल साफ है-जब 16 साल पुरानी मांग पूरी हो सकती है तो 80 साल पुरानी मांग क्यों नहीं?

डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन की मांग करीब 2008-09 से उठ रही थी, यानी लगभग 16 साल पुरानी। यह मांग सर्वे से शुरू हुई और कल कैबिनेट की मंजूरी तक पहुंच गई। लेकिन सरगुजा की बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन की कहानी 16 नहीं, 80 साल पुरानी है। इसका प्रमाण सरकारी दस्तावेज हैं। पहला दस्तावेज 26 अप्रैल 1947 का है। देश आजाद भी नहीं हुआ था, तब ईस्ट इंडियन रेलवे के इंजीनियर-इन-चीफ ने सरगुजा स्टेट के दीवान को चिट्ठी लिखी थी। इसमें विषय था-जनरल मैनेजर टूर ऑफ बरवाडीह चिरमिरी सर्वे। इसमें उल्लेख था कि अंबिकापुर-गढ़वा रोड पर प्रस्तावित रेल अलाइनमेंट देखने के लिए जनरल मैनेजर आ रहे हैं, उनके लिए गेस्ट हाउस और गाइड की व्यवस्था की जाए। यानी आजादी से पहले ही इस लाइन का सर्वे चल रहा था। 17 मार्च 2022 के दस्तावेज बताते हैं कि रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली ने सर्वे की मंजूरी दी। तत्समय जारी आदेश में लिखा है-बरवाडीह चिरमिरी (अंबिकापुर) न्यू लाइन, एफएलएस लंबाई 182 किलोमीटर, सर्वे लागत 4.55 करोड़ रुपये। 1947 के 75 साल बाद फिर से उसी लाइन का फाइनल लोकेशन सर्वे पास हुआ। लेकिन 2022 से 2026 तक चार साल बीत गए, सर्वे पूरा होकर डीपीआर और मंजूरी तक नहीं पहुंच पाया।

सरगुजा के लिए इच्छाशक्ति की कमी

सरगुजा की यही नहीं अंबिकापुर-रेनुकोट, अंबिकापुर-कोरिया-जगदलपुर जैसी सभी लाइनें आज भी सर्वे और डीपीआर के चक्रव्यूह में फंसी हैं। जबकि सरगुजा संभाग आज सबसे ज्यादा कोयला, बिजली और खनिज देता है, रेल लाइन से कोयला ढुलाई का सबसे ज्यादा फायदा रेलवे को ही होगा। सवाल यह उठ रहा है कि जब डोंगरगढ़-कटघोरा के लिए सरकार इच्छाशक्ति दिखा सकती है तो सरगुजा के लिए क्यों नहीं? बीते दिवस कैबिनेट में बैठे सरगुजा के चार मंत्रियों ने सरगुजा की रेल परियोजनाओं के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई? क्या सरगुजा को सिर्फ चुनाव में रेल का सपना दिखाया जाता रहेगा और फाइलें सिर्फ सर्वे में घूमती रहेंगी?

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