स्कूलों में फर्नीचर के नाम पर 67 लाख डकारने के मामले में 20 हजार पन्नों का चालान पेश

शिक्षा विभाग का महाघोटाला: सेवानिवृत्त डीपीसी सहित 10 हैं आरोपी

अंबिकापुर। अविभाजित सरगुजा जिले में बच्चों के बैठने के लिए आए फर्नीचर के पैसे को अफसरों और सप्लायरों ने मिलकर हड़प लिया। 15 साल पुराने इस चर्चित राजीव गांधी शिक्षा मिशन फर्नीचर घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो/एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने बड़ी कार्रवाई की थी। ब्यूरो ने 12 अक्टूबर, सोमवार को 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 20,000 पन्नों का चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अंबिकापुर में पेश किया है। सभी आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) और भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।आबंटन के बाद ऐसे हुआ घोटालावर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए शासन ने 2.70 करोड़ रुपये का आवंटन दिया था। जिला कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को 2 करोड़ 68 लाख 18 हजार 838 रुपये के क्रय आदेश जारी किए। 28 मार्च 2011 को जिला मिशन संचालक और जिला परियोजना समन्वयक के संयुक्त हस्ताक्षर से चेक जारी हुए। आदेश में साफ था कि 20 दिन के भीतर स्कूलों में फर्नीचर पहुंचाना है। हकीकत कुछ और थी। कलेक्टर सरगुजा ने तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसने 3 जून से 12 जून 2013 तक जांच कर 19 जुलाई 2013 को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में भंडार क्रय नियमों की खुलेआम अनदेखी का खुलासा हुआ।

कलेक्टर का आदेश दरकिनार, बिना सत्यापन बांटे चेक

जांच में पाया गया कि, तत्कालीन कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि, फर्नीचर का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही फर्मों को चेक दिए जाएं, लेकिन तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर 6 अप्रैल 2011 से 9 अप्रैल 2011 के बीच ही बिना एक भी टेबल-कुर्सी पहुंचाए सभी फर्मों को चेक बांट दिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह पद का दुरुपयोग कर स्वयं और फर्मों को लाभ पहुंचाने तथा शासकीय राशि के गबन की मंशा से किया गया कृत्य था। नियमों को ताक पर रख दिया गया। फर्मों ने बिल के साथ स्कूलवार आपूर्ति की सूची और प्रधान पाठकों की हस्ताक्षरयुक्त पावतियां नहीं दीं। भुगतान के बाद भी पावतियां नहीं ली गईं। फर्नीचर की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया, फर्मों से अनुबंध तक नहीं किया गया और 3 प्रतिशत सुरक्षा निधि भी जमा नहीं कराई गई। वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार बजट लैप्स होने से बचाने के लिए अग्रिम आहरण और बिना आपूर्ति भुगतान गंभीर वित्तीय अनियमितता है।

फर्जी फर्म का खेल, 7 लाख कमीशन का आरोप

विवेचना में सबसे शातिर खेल सामने आया। एस.पी. पाण्डेय ने 18 फरवरी 2011 को दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम जारी क्रय आदेश उन्हें देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस अंबिकापुर के संचालक संजय पटेल को दे दिया और उसे दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से बैंक खाता खोलने कहा। संजय पटेल ने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स अंबिकापुर में उसी नाम से खाता खोलकर 28 मार्च 2011 का चेक क्रमांक 625255, राशि 22,91,909 रुपये जमा कर पूरी राशि निकाल ली। आरोप है कि असली फर्म की जगह फर्जी फर्म बनाकर भुगतान कराया गया।

अफसर को 7 लाख रुपये कमीशन देना कबूला

पूछताछ में संजय पटेल ने खुद कबूला कि उसने 7 लाख रुपये कमीशन के रूप में जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय को दिए थे और बाकी पैसे से फर्नीचर सप्लाई करने को कहा गया था, लेकिन उसने किसी भी स्कूल में एक भी फर्नीचर नहीं दिया। इसी तरह महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर के संचालक प्रेमचन्द जैन को 28 मार्च 2011 का चेक क्रमांक 625156, राशि 11,44,349 रुपये दिया गया। राशि निकालने के बाद उनकी फर्म ने भी किसी स्कूल में आपूर्ति नहीं की। प्रेमचन्द जैन की मृत्यु 7 अगस्त 2025 को हो चुकी है। शेष आठ फर्मों ने आदेशित मात्रा से काफी कम फर्नीचर दिया।

इतनी राशि का किया गया कुल गबन

फर्मवार गणना में बिना आपूर्ति के 56,84,848 रुपये, वैट की राशि 9,47,938 रुपये और निरीक्षण शुल्क 1,15,222.28 रुपये, कुल 67,48,008.28 रुपये का गबन होना पाया गया है। चालान में प्रधान पाठकों के प्रमाणपत्र, खरीदी और भुगतान के अभिलेख और फर्जी फर्म से जुड़े दस्तावेज शामिल किए गए हैं।

चालान में इन्हें बनाया गया है आरोपी

चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय (वर्तमान में सेवानिवृत्त) और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल मुख्य आरोपी हैं। इनके अलावा अंबिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स के अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की संचालिका ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज के राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संदीप तिवारी, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संजीव गुप्ता के नाम शामिल हैं। ईओडब्ल्यू के अनुसार सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को कई बार नोटिस देकर पक्ष रखने को कहा गया, लेकिन दोनों ने जांच में सहयोग नहीं किया। आखिरकार 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर दोनों को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट अंबिकापुर के समक्ष पेश कर 24 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड लिया गया था।

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