सरगुजा संभाग में कृषि क्रांति की तैयारी, खरीफ की समीक्षा, रबी के लिए बड़ा रोडमैप

कृषि उत्पादन आयुक्त ने फसल विविधीकरण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और किसानों का आय दोगुना करने पर किया फोकस

फोटो-10 छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी की अध्यक्षता में गुरुवार को अंबिकापुर में कृषि एवं संबद्ध विभागों की संभागीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में खरीफ 2026 की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ ही रबी 2026-27 की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि किसानों की आमदनी सिर्फ धान से नहीं बढ़ेगी। इसके लिए खेती के साथ कुक्कुट पालन, मछली पालन, बकरी पालन और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देना अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय से एकीकृत कार्ययोजना बनाकर जमीनी स्तर पर योजनाओं को लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में संचालक कृषि राहुल देव, पशु चिकित्सा संचालक चंद्रकांत वर्मा, उद्यानिकी संचालक लोकेश कुमार, मत्स्य संचालक नारायण सिंह नाग, बीज निगम संचालक अजय अग्रवाल, नाबार्ड के महाप्रबंधक डी.के. गवली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। संभाग अंतर्गत सरगुजा जिला कलेक्टर अजीत वसंत, जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास, सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील, बलरामपुर कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े, कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने पीपीटी के माध्यम से अपने जिलों की प्रगति प्रस्तुत की। बैठक में एफएफएस के माध्यम से उर्वरक वितरण, साथी-2 पोर्टल से बीज वितरण, पीएम धन-धान्य योजना और किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।

खरीफ में सरगुजा का बेहतर प्रदर्शन

आयुक्त ने कहा कि खरीफ 2026 में पूरे प्रदेश में कृषि विभाग ने अच्छा काम किया है, जिसमें सरगुजा संभाग के सभी जिलों का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। उन्होंने कहा कि इसी टीम भावना के साथ रबी सीजन में भी लक्ष्य हासिल करना होगा। उन्होंने रबी की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की जरूरतों के अनुसार बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी जिले में खाद-बीज की कमी नहीं होनी चाहिए।

फसल विविधीकरण पर विशेष जोर

बैठक में सबसे ज्यादा जोर फसल विविधीकरण पर दिया गया। आयुक्त ने कहा कि किसानों को पारंपरिक धान की खेती से हटकर दलहन, तिलहन, प्राकृतिक खेती और उद्यानिकी की ओर प्रोत्साहित किया जाए। सरगुजा संभाग में कृषि विकास की असीम संभावनाएं हैं। यहां की जलवायु लीची, स्ट्रॉबेरी, ऑयल पाम और आलू जैसी नगदी फसलों के लिए बेहद अनुकूल है। रबी पड़ती जमीन में संचित नमी का उपयोग कर अतिरिक्त क्षेत्र में खेती का विस्तार किया जाए। साथ ही पीएम आशा योजना की समीक्षा करते हुए सरसों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा। उद्यानिकी विभाग की समीक्षा में ऑयल पाम के साथ इंटर क्रॉपिंग, धान आधारित फसल पद्धति में उद्यानिकी फसलों को शामिल करने और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया गया।

पशु और मछली पालन आय का बड़ा जरिया

मत्स्य पालन और पशुधन विकास विभाग की समीक्षा में एलएसडी, पीपीआर टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, गौधाम और गौशाला संचालन की प्रगति देखी गई। आयुक्त ने पशु चिकित्सकों को नियमित स्वास्थ्य जांच के निर्देश दिए। मत्स्य पालकों की कार्यशाला आयोजित कर उत्पादन बढ़ाने और महिला भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा ने कहा कि सरगुजा संभाग कृषि उत्पादन के साथ पशुपालन और उद्यानिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे किसानों की आय में प्रत्यक्ष बढ़ोतरी हो रही है। परंपरागत तरीकों के साथ नए नवाचारों को अपनाना जरूरी है।

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