आईएफएस ने आधी रात की छापामार कार्रवाई, अवैध लकड़ी से लदे 3 वाहन जब्त किए

हाइड्रोलिक क्रेन और ग्रैबर से हो रही थी लकड़ी की लोडिंग, ट्रक, ट्रैक्टर व लोडर वाहन जब्त

अंबिकापुर। सरगुजा के जंगलों को खोखला कर रहे वन माफियाओं के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आईएफएस कुणाल मिश्रा के नेतृत्व में लुण्ड्रा वन परिक्षेत्र में आधी रात को दबिश देकर विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करी के हाई-टेक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

मुखबिर की सूचना पर की गई इस कार्रवाई में मौके से 3 बड़े वाहन जब्त किए गए हैं। वन विभाग के साथ ही राजस्व विभाग ने भी कार्रवाई में भागीदारी की और भारी मात्रा में ल_ों को कब्जे में लिया है। मामला सिर्फ लकड़ी तस्करी का नहीं, बल्कि इसके हाई-टेक तरीके ने अधिकारियों को भी चौंका दिया है। अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर भारी-भरकम जॉन डियर ट्रैक्टर-लोडर माइन 5310 से लोडिंग कर रहे थे, जिसमें हाइड्रोलिक क्रेन और लोहे के बड़े ग्रैबर जबड़े लगे थे। इसी मशीन से वजनी ल_ों को उठाकर 12 चक्का ट्रक में भरा जा रहा था। तस्कर पूरी खेप को रातों-रात ठिकाने लगाने वाले थे। इससे पहले ही वन अमले ने चारों ओर से घेराबंदी कर सिंडिकेट को दबोच लिया। इस ऑपरेशन में लुण्ड्रा रेंजर बीना पटेल, परिक्षेत्र सहायक संजय तिर्की, अलवीन कुजूर, सतीश यादव, दिनेश तिवारी, मूलचंद, राम पंडो, अवधेश कुमार, सोमनाथ बड़ा, प्रवीण सिंह, कुबेर सिंह, राजन गुप्ता सहित पूरा वन अमला रातभर मुस्तैद रहे। अब विभाग जांच कर रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में बेशकीमती लकड़ी किस जंगल से काटी गई और इस सिंडिकेट के पीछे कौन से बड़े सरगना हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने मामले में पीओआर क्रमांक 18654/15 दर्ज किया है। आरोपियों के विरूद्ध छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 की धारा 3, धारा 22(2) और भारतीय वन अधिनियम की धारा 52(1) के तहत गैर-जमानती कार्रवाई की गई है। धारा 52(1) के तहत अवैध वनोपज के साथ प्रयुक्त सभी वाहनों और औजारों को राजसात करने का प्रावधान है।

इन वाहनों को किया जब्त

12 चक्का ट्रक क्रमांक सीजी 15 एसी 5272, जिसमें अवैध लकड़ी लोड की जा रही थी। स्वराज ट्रैक्टर क्रमांक सीजी 14 एमई 9903। जॉन डियर लोडर हाइड्रोलिक क्रेन और ग्रैबर जबड़े से लैस स्पेशल मशीन। वन विभाग की टीम ने मौके से फोटोग्राफिक साक्ष्य भी संकलित किए हैं। जांच में पाया गया कि परिवहन के लिए कोई एनओसी या वैध दस्तावेज नहीं था और रात्रिकालीन अवैध परिवहन कर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था।

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