कारण बताओ नोटिस से भड़के पटवारी, नोटिस की प्रतियां जलाकर किया विरोध

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 अक्टूबर से जारी है। हड़ताल से वापसी नहीं होने की स्थिति में कलेक्टर के निर्देश पर सभी तहसीलों के हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसमें उल्लेख है कि बिना पूर्व सूचना और छुट्टी स्वीकृत कराए हड़ताल पर जाना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3-1 का उल्लंघन है, जो गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद सरगुजा जिले के राजस्व पटवारियों का आंदोलन और तेज हो गया है। सोमवार को शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद जिले के सभी पटवारी अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे रहे। नाराज पटवारियों ने सोमवार को अंबिकापुर के हड़ताली चैक पर जमकर नारेबाजी की और कलेक्टर कार्यालय से जारी कारण बताओ नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।

बता दें कि, कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर आंदोलनरत सभी राजस्व पटवारियों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में इन्हें तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसमें गिरदावरी, डीबीसीएस सर्वे, पॉलीगन निर्माण जैसे समयबद्ध काम शामिल हैं। इस आदेश से आक्रोशित पटवारियों ने हड़ताली चैक पर एकत्र होकर शासन पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल दोनों ओर अडियल रुख के कारण सरगुजा में राजस्व संबंधी कामकाज ठप हैै। अब मामला और गरमाने के आसार हैं। इस दौरान जिले के पटवारी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।

शासन आंदोलन को खत्म कराने दमन पर उतारू

राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने कहा कि संविधान ने सभी को अपनी मांगें रखने का पूरा अधिकार दिया है। शासन दमन करके आंदोलन को खत्म करने का प्रयास कर रही है, जो गलत है। हम अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। जब तक पदोन्नति, वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों पर फैसला नहीं होगा, हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन का यह आरोप गलत है कि पटवारी बिना सूचना हड़ताल पर गए। हमारे द्वारा 12 अक्टूबर को ही कलेक्टर कार्यालय जाकर 13 तारीख से हड़ताल पर रहने की सूचना दी गई थी। उसके बाद रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम संदेश भी दिया गया था। इसलिए बिना सूचना हड़ताल पर बैठने की जानकारी गलत है। हम वार्ता करना चाहते हैं, सकारात्मक वार्ता हो। दोनों पक्ष बैठें। इस लड़ाई में सबसे ज्यादा आम जनता, किसान भाई प्रभावित हो रहे हैं। धान खरीदी बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है, इसलिए शासन जल्दी वार्ता की पहल करे। उन्होंने पदोन्नति सबका अधिकार है, जिसे हम लेकर रहेंगे।

कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि, ”पटवारियों के हड़ताल में चले जाने से शासन के महत्वपूर्ण कार्य खरीफ गिरदावरी, एग्रीस्टेक के तहत डीबीसीएस सर्वे, पॉलीगन निर्माण जैसे किसान हित के कार्य बाधित हो रहे हैं। शासन द्वारा उनके लिए वैकल्पिक सुविधा दी गई है। 72 घंटे के अंदर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी फसल क्षति की जानकारी दे सकते हैं। अगर पटवारी वापस नहीं आते हैं तो सर्वे के लिए बीमा कंपनियों, कृषि विभाग या मौसम विभाग से सर्वे करवाया जाएगा। शासन अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था देखेगी। सभी को काम पर लौटने के लिए कहा गया है, नहीं लौटने पर नियमानुसार हड़ताल अवधि को अवैतनिक और ब्रेक इन सर्विस की श्रेणी में मानते हुए पटवारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

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