विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विवाद को शासन तत्काल संज्ञान ले, उच्चस्तरीय जांच की मांग

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा में कुलपति एवं कुलसचिव के बीच नियुक्ति एवं प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सामने आ रहे विवाद को लेकर युवा कांग्रेस आरटीआई सेल के चेयरमैन हिमांशु जायसवाल ने संचालक, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।कहा गया है कि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा संभाग के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है। ऐसे में विश्वविद्यालय के शीर्ष स्तर पर कुलपति एवं कुलसचिव के बीच उत्पन्न प्रशासनिक विवाद का लंबे समय तक बने रहना विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के हित में नहीं है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कुलपति द्वारा कुलसचिव डॉ. शारदा त्रिपाठी की नियुक्ति को नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात कही गई है। इस विवाद के सार्वजनिक होने एवं मीडिया माध्यमों तक पहुंचने से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि, कुलसचिव डॉ. शारदा त्रिपाठी की नियुक्ति से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया, नियम एवं दस्तावेजों की शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हुई समस्त खरीदी, निविदा, भुगतान एवं निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। विश्वविद्यालय में पिछले वर्षों में हुई नियुक्तियों एवं पदस्थापनाओं की भी नियमों के अनुरूप समीक्षा कराने की मांग की गई है। यदि किसी नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए योग्य एवं अनुभवी लोगों को विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय में चल रहे प्रशासनिक विवाद का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाओं, परिणाम एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसलिए शासन को मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर विश्वविद्यालय में पारदर्शी एवं सुचारू प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। युवा कांग्रेस आरटीआई सेल के चेयरमैन हिमांशु जायसवाल एवं विश्वविद्यालय अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, प्रशासनिक पारदर्शिता एवं विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना है। यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो शासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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