बिना वैध लाइसेंस के चल रहा था आरा मिल, 5 लाख से अधिक की लकड़ी जब्त

प्रशिक्षु आईएफएस के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने की छापामार कार्रवाई

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध लकड़ी के कारोबार पर प्रशिक्षु आईएफएस के नेतृत्व में वन विभाग का लगातार प्रहार जारी है। इसी क्रम में लुंड्रा वन परिक्षेत्र के रघुनाथपुर में बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रहे एक लकड़ी मिल में विभागीय टीम ने अचानक दबिश देकर बड़ी मात्रा में इमारती लकड़ी बरामद की है। कार्रवाई में सागौन, साल, खमार जैसी प्रतिबंधित और कीमती प्रजातियों का चिरान मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत 5 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। मौके से लकड़ी परिवहन में इस्तेमाल हो रहा एक पिकअप वाहन भी जब्त किया है।

जानकारी के मुताबिक, वन विभाग को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि रघुनाथपुर क्षेत्र में अवैध रूप से आरा मिल चल रही है और जंगलों से लकड़ी काटकर वहां चिरान किया जा रहा है। मुखबिर की पुख्ता सूचना के बाद प्रशिक्षु आईएफएस और अंबिकापुर वन मंडल के एसडीओ कुनाल मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के मिल परिसर में छापा मारा। जांच के दौरान अधिकारियों को मौके पर बड़ी मात्रा में लकड़ी और चिरान मिले। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा सागौन और साल की थी, जो वन अधिनियम के तहत अत्यंत संरक्षित श्रेणी में आती है। इसके अलावा खमार और अन्य मिश्रित प्रजातियों की लकड़ी भी बरामद हुई। प्रारंभिक पूछताछ में मिल संचालक लकड़ी के स्रोत को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

सबसे बड़ा खुलासा लाइसेंस को लेकर हुआ। जांच में सामने आया कि जिस मिल पर कार्रवाई हुई है, उसका लाइसेंस वर्ष 2024 के बाद नवीनीकृत ही नहीं हुआ है। मौके पर लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और लकड़ी खरीद-बिक्री से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे साफ हो गया कि मिल पूरी तरह से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। बताया जा रहा है कि इस मिल का संचालन रघुनाथपुर निवासी सुरेश गुप्ता और आकाश गुप्ता के द्वारा किया जा रहा था। वन विभाग ने दोनों व्यक्तियों को इस अवैध कारोबार का मुख्य कर्ताधर्ता मानते हुए उनके विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम और छत्तीसगढ़ आरा मिल नियमों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

लकड़ी कहां से लाई गई, जांच में जुटा वन विभाग

वन विभाग का कहना है कि, बरामद लकड़ी कहां से लाई गई, क्या यह सीधे जंगल से अवैध कटाई कर लाई गई है या किसी अन्य माध्यम से खरीदी गई, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। पिकअप वाहन के नंबर से भी परिवहन के रूट को ट्रेस किया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद लकड़ी की नीलामी और आरोपियों पर जुर्माने के साथ-साथ जेल की कार्रवाई भी हो सकती है। इस कार्रवाई के बाद पूरे सरगुजा वन वृत्त में अवैध रूप से चल रही अन्य छोटी-बड़ी आरा मिलों में हड़कंप मच गया है। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि आनेवाले दिनों में ऐसे अवैध कारोबारों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

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