झारखंड के डॉक्टर की डिग्री में कूटरचना करके नुरैल आलम करने लगा नौकरी

निजी हॉस्पिटल ने सीआईपीएसीए कंपनी के जरिए आउटसोर्स पर रखा था डॉक्टर

अंबिकापुर। शहर के गांधीनगर में संचालित श्री महावीर हॉस्पिटल में मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ का मामला सामने आया था। यहा सीआईपीएसीए कंपनी के जरिए आउटसोर्स पर रखा गया डॉक्टर नुरैल आलम फर्जी निकला। उसने झारखंड के एक असली डॉक्टर की डिग्री में कूटरचना करके खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया।

मामले का पर्दाफास स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ है, इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सरगुजा डॉ. जेआर सरोता ने गांधीनगर थाने में इसकी जानकारी दी, जिस पर पुलिस ने आरोपित के विरूद्ध एफआईआर पंजीबद्ध कर लिया है। बड़ी बात यह है कि, जिस कंपनी के मार्फत उक्त चिकित्सक आईसीयू जैसे संवेदनशील जगह में गंभीर मरीजों के बीच सेवा दे रहा था, वह कंपनी एक स्वास्थ्य सेवा संगठन के रूप में अस्पतालों में उन्नत आईसीयू और आपातकालीन सेवाएं स्थापित करने और संचालित करने का काम करती है।

क्यूआर कोड ने फर्जीवाड़े की खोली पोल

सीएमएचओ ऑफिस, दर्रीपारा में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 लीगल शाखा प्रभारी की ओर से थाने में दी गई लिखित शिकायत पत्र के अनुसार कलेक्टर सरगुजा के निर्देश पर 16 अक्टूबर 2026 को श्री महावीर हॉस्पिटल, साईं मंदिर के पास, गांधीनगर का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण दल ने हॉस्पिटल प्रबंधन से वहां कार्यरत सभी डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल काउंसिल पंजीयन के कागजात मांगे गए। हॉस्पिटल ने डॉ. नुरैल आलम का पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच में शक होने पर निरीक्षण दल ने प्रमाण पत्र पर लगे क्यू कोड को स्कैन किया तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।

पंजीयन निकला डॉक्टर अमरेश कुमार का

क्यू कोड स्कैन करने पर प्रमाण पत्र पर दर्ज नाम अमरेश कुमार पिता अभिनंदन कुमार, पता महुआटोली, लालगंज के पास, पोस्ट सुगुन, थाना खेलागांव, जिला रांची, पिन 835103, झारखंड का होना पाया गया। जांच में सामने आया कि वास्तव में यह पंजीयन झारखंड के डॉक्टर अमरेश कुमार का था, जिस पर कूटरचना कर नुरैल आलम ने अपना नाम चिपका दिया था।

सीआईपीएसीए कंपनी भी रडार पर

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी डॉक्टर नुरैल आलम को सीआईपीएसीए हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने आउटसोर्स के माध्यम से महावीर हॉस्पिटल में उपलब्ध कराया था। बिना दस्तावेजों का सत्यापन किए कंपनी ने कैसे एक फर्जी डॉक्टर को हॉस्पिटल में लगवा दिया, इस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कलेक्टर केे अनुमोदन पर एफआईआर

इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सीएमएचओ ने कलेक्टर सरगुजा से अनुमोदन प्राप्त किया और थाना प्रभारी गांधीनगर को पत्र लिखकर डॉ. नुरैल आलम और उसे नियुक्त करने वाली सीआईपीएसीए हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी दोनों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने को कहा है। पत्र के साथ 32 पन्नों के दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

कितने मरीजों की जान जोखिम में गई

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक हॉस्पिटल का मामला नहीं है, बल्कि जिले में आउटसोर्स कंपनियों के जरिए कई निजी हॉस्पिटलों में ऐसे फर्जी डॉक्टरों के काम करने की आशंका है। पुलिस एफआईआर के बाद कंपनी के रिकॉर्ड और हॉस्पिटल प्रबंधन से भी पूछताछ करेगी कि कितने दिनों से यह फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहा था और कितने मरीजों की जान जोखिम में डाली गई।

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